Waheguru Ji
By Minkal Narula
वो मुझे जानते है और पहचानते हैं
समझते हैं और समझाते हैं
हर मुश्किल राह से मुझे बचाते हैं
वाहेगुरू जी ही हैं जो बिना किसी मतलब के साथ निभाते है
हर बार गिरती हूं हर बार मुझे उठाते हैं
वो मुझे मुझसे भी ज्यादा चाहते हैं
मंजिल तो बहुत होती हैं पर सही मंजिल वो ही दिखते हैं
भटकते भटकते को भी सही रास्ते ले जाते हैं
वाहेगुरू जी ही है जो मुझे मुझसे भी ज्यादा चाहते हैं
हर जाऊं जब पूरी तरह से
नई उम्मीद भी वो ही जगाते हैं
ना दिखने वाले रास्ते भी अपने आप दिख जाते हैं
वाहेगुरू जी ही हैं जो मुझे मुझसे ज्यादा चाहते हैं
मुश्किल आके भी चली जाती हैं क्योंकि मेरे साथ वो निभाते हैं
हां वो मुझे मुझसे भी ज्यादा चाहते हैं
शुक्र करो उनका जो हर मोड पर तुम्हारे हैं
शुक्र करो उन का जिन के दुनिया सहारे हैं
शुक्र मै शुक्र करो कि हम उनके और वो हमारे हैं
By Minkal Narula

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