Waalid
By Jeeshant Mathur (Shayak)
सितारों में वालिद को ढूंढते ढूंढते
खुद वालिद होने कि उमर हो गई
पता नहीं कैसे पल गई आपकी सब औलाद
यहां तो टूटने लायक अब मेरी कमर हो गई
लोग कहते हैं अक्सर कि बड़े तन्हा रहते हो मिया
क्या अंधेरों में आज कल तुम्हारी बसर हो गई
आप दिख जाओ यार एक दफा अब मुझको कही
पूरी होने कि इस ख्वाइश कि इंतहा भी अमर हो गई
काश आपकी हथेलियां छु पाती मेरे हाथो के आबले
आपके निकम्मे कि शायरी सारे शहर कि खबर हो गई
रह जाते तो कहानी शायद कुछ लाज़वाब ही होती
तक़दीर मेरी बिना आपके कौनसी संग मरमर हो गई
By Jeeshant Mathur (Shayak)

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