Waada
Updated: Jun 3, 2023
By Oves Khan
जो मेरे बस में हुआ अगर तो
जाड़े की सा धूप बना करूंगा
ठंडी पड़ी हर हसरतों को तेरी
धीमी तपिश से सेका करूंगा
जो मेरे बस में हुआ अगर तो
बारिश की बूंद सा बहा करूंगा
सूखी हुई ख्वाहिशों को तेरी
अपने वजूद से सींचा करूंगा
जो मेरे बस में हुआ अगर तो
शीशे की तरह रहूंगा ज़ाहिर
उस और से जो दिख रहा हूं
इस और भी वैसा रहा करूंगा
जो मेरे बस में हुआ अगर तो
गुलाब बन के खिलूंगा ऐसे
तेरे हुस्न के बाग़ीचे से
मैं इत्र बन के महका करूंगा
बस मेरे बस में हुआ अगर तो
मोहब्बत की हसीन किताब पर मैं
पहला हर्फ़ भी लिखूंगा तुझको
आखरी 'अल्फ़ाज़' तक तुझे लिखा करूंगा
हाँ मेरे बस में हुआ अगर तो ।।
By Oves Khan

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