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Vivan The Super Hero

Updated: Feb 12, 2024

By Chirag


“परी! क्या सच में विवान के पास सुपर-पावर आ गई होगी?” 8 साल के दिव्यम ने दौड़ते हुए अपने यूनिफॉर्म की हाफ-पेन्ट ऊपर चढ़ायी और पूछा । साथ दौड़ रही 10 साल की परी ने गुस्से से दिव्यम की और देखा और गुर्राई “दिव्यम डफ़र ..तुझे सुपर-पावर की पड़ी है! मुझे तो टेंशन है की विवान को कहीं चोट ना लग जाएँ...चल अब थोड़ा तेज़  दौड़।” 

 दोनों बच्चों ने गुलमहोर के एक विशाल पेड़ के पास आकर अपने पैरों को ब्रेक लगाई और वहाँ खड़ी 7 साल की मिष्टी को देखा । मिष्टी की नज़र पेड़ पर टिकी हुई थी। परी ने पूछा “मिष्टी, विवान कहाँ हैं?” मिष्टी ने अपनी उंगली पेड़ की ओर तानी। तीनों दोस्तों की नज़र पेड़ की सब से ऊंची टहनी पर खड़े विवान पर पड़ी । 

विवान ने भी बाकी बच्चों की तरह स्कूल यूनिफॉर्म पहेनी थी । उसके गले में “फ्लाइंग-मेन” नाम के सुपर-हीरो का नीले रंग का केप बंधा था और दायें हाथ में उसकी फेवरीट आइस-क्रीम का कॉन । विवान मज़े से आइस-क्रीम खा रहा था । परी दो कदम आगे आयी और विवान को धमकाते हुए बोली “विवान ! तू नीचे आ, बहोत मारूँगी तुझे।” इस पर मिष्टी बोल पड़ी  “ऐसे बोलेगी तो विवान नीचे थोड़ी आएगा? प्यार से बोलोना।” परीने मिष्टी की ओर नाराज़गी से देखा और बोली “मिष्टी ..तू तो बोल ही मत । तू विवान के साथ थीना? तूने उसे पेड़ पर चढ़ने से रोका क्यों नहीं?” मिष्टी ने भोली सूरत बनाकर कहा “मेरी गलती नहीं हैं! विवान ने बोला की वह पेड़ से आम तोड़ के लाएगा ।“  दिव्यंम ने मिष्टी की चोटी खींचते हुए कहा “बुद्धू! गुलमहोर के पेड़ पर आम होते हैं कभी?” मिष्टी कुछ बोले उससे पहेले पेड़ पर से विवान की आवाज़ आयी “फ़्रेंड्स,नथिंग इज़ इम्पॉसिबल फॉर फ्लाइंग-मेन । टुडे आइ विल फ्लाय ।” विवान अपनी आइस-क्रीम खतम कर चुका था और अब उडने के लिए तैयार था । 

 तीनों बच्चें यह सुनकर गभरा गए और एक साथ चिल्लाए “ डॉन्ट जंप विवान  .. डॉन्ट जंप ।” परी ज़ोर से बोली  “प्लीज विवान, ऐसा मत कर । फ्लाइंग-मेन की केप पहेनने से कोई उड़ नहीं सकता।” लेकिन विवान की नज़र तो आसमान पर थी । विवान ने दोनों हाथ पंख की तरह फैलाए, बिल्कुल उसी तरह जैसे उसका पसंदीदा  सुपरहीरो फ्लाइंग-मेन फैलाता है और हवा मे छलांग लगा दी।  नीचे खड़े तीनों बच्चे एक साथ चीख पड़े  “विवान!”


                                                          ********

 “विवान....विवान... पास्ता खा लिए हो तो प्लेट किचन में रख दे।” रसोई-घर  से मम्मी ने आवाज़ लगाई।  लेकिन विवान के कान और आँखे टीवी में चल रही “फ्लाइंग-मेन” की एंटी-ग्रैविटी मार-धाड़ पर टिकी थी। फ्लाइंग-मेन के सुनहेरे पंख, बाज़ की डिजाइन का टी-शर्ट और गले में पहेने नीले चमचमाते रंग के केप की रोशीनी में विवान डूब गया था। उसके दायें पैर पर प्लास्टर था और बायें हाथ में भरी हुई प्लेट। लेकिन फिर भी विवान अपने बायें पैर और दायें हाथ से फ्लाइंग-मेन के एक्शन की नकल कर रहा था। हमेशा की तरह एपिसोड के अंत में फ्लाइंग-मेन ने अपना फेमस डायलॉग सुनाया “नथिंग इज़ इम्पॉसिबल फॉर फ्लाइंग-मेन ।” विवान ने भी अपने सुपर-हीरो के साथ वही डायलॉग दोहराया । और फिर टीवी में फ्लाइंग-मेन की तस्वीर को देखते हुए बड़बड़ाया “एक दिन मेरे पास भी ऐसी फ्लाइंग-मेन की कोसचयूम होगी और फिर मैं भी फ्लाइ करूंगा !” तभी पीछे से मम्मी ने आकर विवान के सर पे टपली मारी और बोली “फ्लाई करेगा ?..पैर तुड़वा लिया फिर भी अक्कल नहीं आयी। गलती की मैंने जो तेरे लिए फ्लाइंग-मेन का केप ले आयी।” विवान ने फोरन जवाब दिया । “राइट मम्मी, सिर्फ केप क्यों लायी? इसलिए तो गड़बड़ हो गई, एकचूली तुम्हे फ्लाइंग-मेन का पूरा कोसचयूम लाना चाहिए था फिर मैं सुपरहीरो की तरह फ्लाई....” विवान वाक्य पूरा करे उससे पहेले मम्मी का हाथ हवा में उठ गया और विवान का खुला मुँह बंध हो गया।  मम्मी ने अपने गुस्से को काबू में करते हुए एक गहेरी साँस ली और बोली ““खबरदार, दोबारा फ्लाइ करने की बात भी की।” विवान ने सर झुका लिया और चुपछाप अपने प्लास्टर पर स्केचपेन से कुछ लिखने लगा ।  

     मम्मी लोगों का गुस्सा आइस-क्रीम की तरह होता है, झट से पिघल जाता है । विवान की मम्मी को भी विवान का गुमसुम चहेरा देख बुरा महसूस हुआ और उन्होंने विवान के सर पे हाथ फेरते हुए कहा “बेटा, सुपर-हीरो कॉमिक्स और फिल्मों में होते है, रियल लाइफ में नहीं। और तू अब इतना छोटा भी नहीं है की यह बात तुझे समझानी पड़े । यह कोसचयूम पहेन लेने से उड़ने की सुपर-पावर मिलना इम्पॉसिबल है। ”  बोलते हुए मम्मी विवान के कंधे को सहलाते लगी । तभी मम्मी का ध्यान विवान के प्लास्टर पर लिखे शब्दों पर गया । विवान ने लिखा था “नथिंग इज़ इम्पॉसिबल फॉर फ्लाइंग-मेन।” मम्मी बेबस नज़रों से विवान को देखती रह गई । उसे समज नहीं आया की विवान को कैसे समजाये। 

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“विवान जैसे-जैसे बड़ा होगा, अपने-आप समज जाएगा। तुम टेंशन मत लो।” विवान के पापा ने रोटी का निवाला मुँह में रखते हुए कहा । मम्मी ने ना में सर हिलाया और बोली “तुम कुछ नहीं समजते। पिछले साल फ्लाइंग-मेन का केप मांगा था और इस जनमदिन पर फ्लाइंग-मेन का कोसचयूम दिलाने की जिद् कर रहा है । मैंने तो साफ मना कर दिया । उसे कोसचयूम दिलाई तो वह पगला इस बार बिल्डिंग से हाई-जम्प करने निकल पड़ेगा।” पापा मुस्कुराकर बोले “इतना भी पगला नहीं है हमारा बेटा।” पापा की मुस्कान ने मम्मी के गुस्से पर पेट्रोल का काम किया। मम्मी बेलन लिए सीधा पापा की और तेजी से बढ़ी। “तुम से तो बात करना ही बेकार है । विवान मेरी बात सुनता नहीं , तुम मेरी बात समजते नहीं.. मैं करू तो क्या करू?” पापा ने खुद को बेलन से बचाते हुए हल्के से कहा “शांत बेलन-धारी भीम शांत! तुम बताओ मैं क्या करू?” मम्मी के पास जवाब तैयार ही था। वोह फट से बोली । “कल सुबह ऑफिस जाने से पहेले विवान को अच्छे से डाँटना।” अचानक मिले इस हुकूम  से पापा चोंक उठे । “यार! तुम हमेशा मुझे विलन क्यों बनाती हो? बड़ा होगा तो बच्चा यही सोचेगा की मम्मी बहोत प्यार करती थी सिर्फ पापा ही राक्षस थे ।” लेकिन पापा की दलील को मम्मी ने नजर-अंदाज़ करते हुए अपना फैसला सुन दिया। “मैं कुछ नहीं जानती। कल उसे डाँटना है तुम्हें बस।“ और मम्मी जज की तरह ऑर्डर सुनाकर चल गई और पापा हारे हुए वकील की तरह वही खड़े देखते रहे।  

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“बहोत डाँटा तेरे पापा ने ?” स्कूल-ब्रेक में साथ नाश्ता कर रहे चारों दोस्तो में से परी बोली । विवान ने परी के टिफ़िन से मुठ्ठी-भर फ्रेंच-फ्राइस उठाई और गर्व से बोला “पापा कुछ बोल तो रहे थे ,लेकिन मुझे तो सिर्फ एक ही वर्ड सुनाई दे रहा था ... ब्ला,ब्ला ,ब्ला !” सभी बच्चे हसने लगे । तभी मिष्टी उत्साह से बोली “विवान , उड़ने से ज्यादा बड़ी सुपर-पावर तो इनविज़िबल होना है । मैं तेरी जगह होती तो इनविज़िबल-मेन....मेरा मतलब इनविज़िबल-गर्ल का गायब कर देने वाला कोसचयूम लेती । सोच, बिना छुपे सब की बातें सुन सकते है, किसी को भूत बनाकर डरा भी सकते है, है ना!?” मिष्टी ने सब दोस्तों की ओर देखा लेकिन किसी ने मिष्टी के इनविज़िबल-हीरो की तरह उसके आइडिया को भी अनदेखा कर दिया। तभी वडा-पाव खा रहा दिव्यंम बोला “मैंने हैना , एक मूवी देखी थी । जिस में  हीरो मन में जो भी खाने की चीज़ सोचता है वह उसके हाथ में आ जाती है ! जस्ट थिंक , अगर मैं अभी मन में सोचू के मेरे सामने एक लार्ज चीज़-क्रस्ट पीत्ज़ा आ जाए और सच में पीत्ज़ा आ गया तो इस से बड़ी सुपरपावर क्या हो सकती है?” इतना बोलते हुए दिव्यंम ने ज़ोर से डकार ली। और फिर सब बच्चे अपनी-अपनी पसंदीदा सुपर-पावर के बारें में बोलने लगे लेकिन विवान किसी गहेरी सोच में  डूबा हुआ था । “क्या सोच रहा है?” परीने विवान से पूछा । विवान ने फिर से मुट्ठी-भर फ्रेंच-फ्राइस उठाई और बोला “यही कि फ्लाइंग-मेन के कोसचयूम के लिए मम्मी को कैसे मनाऊँ?” परी ने विवान को चेतावनी देते हुए कहा “भुलजा, अब एक और बार तूने आंटी से फ्लाइंग-मेन के ड्रेस की बात की तो देखना मार पड़ेगी तुझे।  



                                                             *********

“विवान, तूने ही कोई बदमाशी की होगी वरना मम्मी क्यों मारेगी?” पापा ने गले की टाई लूज़ करते हुए कहा ।   “नहीं पापा, मैंने तो बस बर्थ-डे गिफ्ट में फ्लाइंग-मेन की कोसचयूम मांगी थी। पर मम्मी ने मुझे पीठ पे ज़ोर से, बहोत ज़ोर से मारा..वो भी चार बार!!” विवान मासूम आवाज़ निकालकर बोला और पापा की और टुकर-टुकर देखने लगा । विवान अच्छे से जानता था पापा को पटाने के लिए पपी-फेस बनाना होता है। विवान की भोली पर उदास शक्ल ने फोरम पापा पर असर किया। पापा विवान के पास आए और बोले “तू चिंता मत कर तेरे बर्थ-डे पर मैं फ्लाइंग-मेन की ड्रेस ले आऊँगा.. खुश?” “पापा.. आप बेस्ट हो ।” कहकर विवान पापा के गले लग गया। तभी, उसकी नजर सामने खड़ी मम्मी पर पड़ी । विवान पापा को बताने ही वाला था की तभी पापा बोल पड़े “अच्छा सुन, यह बात मम्मी को मत बताना । तेरे बर्थ-डे में अभी वक्त है।  मैं सही टाइम पर मम्मी को बता दूंगा।  ठीक है ?” इतना कहकर पापा पीछे मुड़े और सामने खड़ी मम्मी को देखा । एक सेकंड के लिए पापा के मन में आया की अभी फ्लाइंग-मेन का कोसचयूम होता तो वह वाकई कहीं उड गये होते । मम्मी विवान और पापा की ओर बढ़ी। बाप-बेटे दोनों ने एक दूसरे को आँखों से ऑल ध बेस्ट कहा। मम्मी ने पापा की और एक नजर देखा जिसका मतलब था की “तुमसे तो मैं बाद में निपटूँगी।” और फिर मम्मी विवान की और झुकी।   “फ्लाइंग-मेन के कोसचयूम के लिए कुछ भी कर सकता हैना तू ?....तो चल मैं तुझे एक चेलेंज देती हु।  अगर तूने यह चेलेंज पूरा कर लिया तो मैं तेरे बर्थ-डे मैं तुझे फ्लाइंग-मेन का कोसचुयम गिफ्ट करूंगी। बोल कर पाएगा मेरा चेलेंज?” विवान ने फोरण पूरे विश्वास के साथ कहा “मम्मी, नथिंग इज़ इम्पॉसिबल फॉर फ्लाइंग-मेन ।” 

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“यह इम्पॉसिबल है विवान!!” ब्रेक में इकट्ठा हुए परी,दिव्यंम और मिष्टी तीनों एक साथ बोल पड़े । “तेरा  बर्थ-डे टेन्थ नवेंबर को है यानि अभी.... ” दिव्यंम उंगलियों पर गिनती करने में उलज गया और उसका अधूरा वाक्य पूरा करते हुए परी बोली “यानि अभी 25 डेज़ बाकी है! मतलब तेरे लिए अब 25 डेज़ तक नो मोबाइल , नो जंक फूड!!” यह सुनकर चीज़-क्यूब खा रहे दिव्यंम का चहेरा ऐसा गंभीर हो गया जैसे टिफ़िन में बेंगन की सब्जी देख के हो जाता था। मिष्टी ने भी फिक्र जताते हुए कहा “ लेकिन इतने दिनों तक बिना गेम्स खेले, बिना पीत्ज़ा , चॉकलेट , बर्गर और आइस-क्रीम खाए कोई कैसे रह सकता हैं?” इसबार सब ने मिष्टी की बात को समर्थन देते हुए हाँ में सर हिलाया। सब बच्चे चिंतित थे लेकिन विवान बाहु-बली के अंदाज में चलते हुए बोला “फ्रेंड्स, जानता हूँ चेलेंज बहोत ही मुश्किल है। लेकिन फ्लाइंग-मेन के कोसचयूम के लिए मुझे यह करना ही होगा । आज से नो विडिओ गेम्स, नो जंक फूड” अब दिव्यम से रहा नहीं गया।  “लेकिन यह इम्पॉसिबल है।“ विवान ने दिव्यंम के हाथ में से चीज़ का टुकड़ा लिया और दिव्यंम के ही मुँह में रखते हुए बोल “नथिंग इस इम्पॉसिबल फॉर फ्लाइंग-मेन ” तीनों दोस्त हैरान होकर विवान को देखते रह गए ।  

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मम्मी-पापा हैरान होकर विवान को देख रहे थे। आज दसवाँ दिन था जब विवान बिना कोई नखरे किए चुपचाप रोटी-सब्जी खाकर सोने चल गया था। । पापा ने मम्मी की और देखते हुए कहा “मैंने तो सोचा था विवान दो दिन भी बिना विडिओ-गेम्स और जंक फूड के नहीं रह पाएगा। लेकिन विवन तो ‘चेतेश्वर पुजारा’ निकला । आउट होने का नाम ही नहीं ले रहा! तुम बोलो तो मैं फ्लाइंग-मेन का कोसचयूम ऑनलाइन ऑर्डर कर दूँ?” मम्मी ने पापा की और तीखी नजर की। “ विवान की यह जंक-फूड की हड़ताल कल ही टूट जाएगी।” तब पापा को मम्मी की आँखों में एक शकुनि नज़र आया। पापा ने कुतूहलता से पूछा “क्या? क्या करनेवाली हो तुम?”  

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“क्या करू में इस लडके का?” पापा मुँह में निवाला रखने ही वाले थे की मम्मी बोल पड़ी। पापा समज गए की उन्होंने इस वक्त मम्मी की बात की जगह अपनी भूख को अहेमीयत दी तो उन्हे कल टिफिन में तीखी-तर्रार सब्जी खानी पड़ेगी। तीखी सब्ज़ी से बचने के लिए उन्होंने मीठे स्वर में पूछा “क्या किया विवान ने?” मम्मी ने फोरन विवान का स्कूल-टिफिन खोलकर दिखाया। उसमें कुछ चॉकलेटस और चीज़-सेन्डविच थी । पापा समज गए की शकुनि के पाँसे उलटे पड गए थे। मम्मी ने अपनी व्यथा बयान करते हुए कहा “ दो दिन से विवान को टिफ़िन ऐसी चीज़े दे रही हूँ। लेकिन वह पूरा टिफिन जैसा का तैसा ले आता है।” पापा ने हँसते हुए कहा “ तुम दुनिया की पहेली माँ हो जो बच्चे के सुधरने से परेशान हो ! अच्छी बात हैना की विवान अब जंक फूड नहीं खा रहा। तुम्हे तो खुश होना चाहिए।” पर मम्मी को इससे राहत नहीं हुई।  वह अपना डर जताते हुए बोली “लेकिन इस उम्र में एक सुपर-हीरो के कोसचयूम के लिए इतनी जिद्द, इतना पागल-पन क्या ठीक है?” पापा ने मम्मी के कंधे पर हाथ रखते हुए कहा “ तुम बेकार डर रही हो। यह पागल-पन नहीं पैशन है। सोचो, अगर इसी पैशन से वह जब लाइफ में कुछ करने की ठान लेगा तो उसे हासिल कर के रहेगा। और सोचो स्कूल में वह भूखा रह रहा है पर घर आकर शिकायत भी नहीं कर रहा। तुम्ही सोचो जिद्द वह कर रहा की तुम?” मम्मी ने नम आँखों से एक नज़र पापा की ओर देखा और बोली “मेरा मोबाईल कहाँ हैं?” पापा अचानक हुए इस सवाल से हैरान हो गए। “मोबाईल? क्यों?” मम्मी बोली “विवान के लिए फ्लाइंग-मेन का कोसचयूम ऑर्डर करना है।” यह सुनते ही पापा मुस्कुराये और मम्मी को गले से लगा लिया। 

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विवान को मम्मी-पापा ने गले से लगा लिया। आज उसका जनम-दिन था। विवान की माँ आज खुद उसे अपने हाथों से चॉकलेट और पिज़्ज़ा खिला रही थी। उसके सभी दोस्त भी उसे बधाई देने आए थे। उसके लिए तोहफे लाए थे। लेकिन विवान को इंतज़ार था अपने उस तोहफे का जिसके लिए उसने इतने दिनों तक अपनी जुबान और अपने मन को काबू में रखा था। विवान के लिए यह काम किसी तपस्या से कम नहीं था। और इसी तमस्या से विवान की मम्मी भी इन्द्र देव की तरह प्रसन्न हो गई थी। विवान को जिस घड़ी का इंतज़ार था वह अब बस आने ही वाली थी । मम्मी ने विवान के आगे एक बडा गिफ्ट बॉक्स रखा। उस बॉक्स को देखते ही विवान की धड़कने तेज़ हो गई।  विवान ने बॉक्स खोला और उसकी आंखे चमक उठी । बॉक्स के अंदर वही सुनहेरे पंख, बाज़ की डिजाइन का टी-शर्ट और नीले रंग  का केप था। विवान का सपना सच हो गया था। 

मम्मी ने विवान के सर पे हाथ रखा और बोली “बेटा, यू डिसर्व इट।” यह सुनकर सब ने तालियाँ बजाई। मम्मी ने भावुक होकर अपना गिल्ट बयान किया। “इस ‘फ्लाइंग-मेन’ की ड्रेस के लिए मैं विवान को बहोत सताया है।  २५ दिनो से विवान ने ना कोई चॉकलेट खाई ना पिज़्ज़ा-बर्गर। ना विडिओ-गेम्स खेली। और ना ही कभी इस बारे में कोई शिकायत की। विवान ने पूरी ईमानदारी से अपना वादा निभाया। पर बे-इमानी तो मैंने की! मैंने विवान को चेलेंज में हराने के लिए उसके टिफ़िन में जान-बुज कर जंक-फूड भरा।  विवान भूखा रहा लेकिन उसने उस खाने को हाथ भी नहीं लगाया।” बोलते हुए मम्मी की आँखे भर आयी । मम्मी ने विवान के हाथ में फ्लाइंग-मेन की कोसचयूम रखा और बोली “आइ एम सॉरी बेटा। मुझे बहोत प्राउड है तुम पर ।” मम्मी ने विवान को गले से लगा लिया। पापा ने बड़ी मुश्किल से अपने आँसू रोके और महोल को हल्का करने के लिए कहा “चल विवान , अब सब को फ्लाइंग-मेन का कोसचयूम पहेनकर दिखा ..क्या कहते हो बच्चों?” सभी बच्चों ने चिल्लाकर हाँ में जवाब दिया । विवान ड्रेस लेकर अपने कमरे में गया। सब विवान को फ्लाइंग-मेन के सूट मे देखने को बेताब थे । लेकिन काफी समय बीत गया पर विवान कमरे से बाहर नहीं आया । मम्मी ने आवाज़  लगाई  “विवान , बेटा जल्दी बहार आ। ” 

आखिरकार सर झुकाए हुए विवान बहार आया।  पर बिना फ्लाइंग-मेन की कोसचयूम पहेने । मम्मी ने हैरान होकर पूछा “विवान कोसचयूम क्यों नहीं पहेनी?” विवान ने मम्मी किया ओर देखा। “सॉरी मम्मी, मैंने चीटिंग की तुम से । मैंने गेम्स भी खेले , चॉकलेट और फ्राइस भी खाए । मेरे फ्रेंड्स ने खिलाए ।” मम्मी-पापा यह सुनकर हैरान हो गए। परी,मिष्टी, दिव्यम भी सर झुकाए खड़े थे। मम्मी को अब भी यकीन नहीं हो रहा था। “मतलब तू हमे इतने दिनों से बेवकूफ बना रहा था ? शर्म नहीं आयी तुझे ? विवान चुपचाप सुनता रहा । पापा ने भी दुख जताते हुए कहा “विवान,बेटा ऐसा क्यों किया तूने?” विवान की आँखे  भर आयी। बड़ी मुश्किल से वोह बोला “सॉरी पापा!.. सॉरी मम्मी”

मम्मी गुस्से में चिल्लाई “अब बंध कर अपना नाटक। अब और बेवकूफ नहीं बननेवाली मैं। तुझे क्या लगता है अब तू सच बोलेगा और मैं माफ कर दूँगी तुझे? तेरी अब किसी बात पर भरोसा नहीं है मुझे। इतने दिन तक हमे अंधेरे में रखा और आज बीच पार्टी में तुझे अपनी गलती समाज आ गई?”

सब खामोश थे । विवान  मम्मी के पास आया और उसका हाथ पकड़ कर धीमे से बोल “मम्मी तुमने रोते हुए जब मुझे सॉरी बोला तब मुझे बहोत बुरा लगा। चीटिंग मैंने की और गिल्टी तुम फ़ील कर रही थी। मम्मी मैं यह फ्लाइंग-मेन की ड्रेस डिसर्व नहीं करता। मैं बहोत बुरा हूँ मम्मी,बहोत बुरा हूँ।“ बोलते हुए विवान की आँखों से आँसू बह निकले। मम्मी ने विवान को सीने से लगा लीया और बोली “तू बुरा नहीं है...तू तो मेरा सुपर हीरो है । सच से बड़ी सुपर-पावर कोई नहीं होती । और वह सुपर-पावर तुझ मे हैं। बेटे, मेरा सुपर हीरो है तू!” 

अंत


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