Tumse Kya Kahoon
By Anurag Nigam
अब मन मचल स गया है
सब कुछ बदल स गया है
सोंचता हूँ मैं गलत हूँ शायद
पर तुमसे क्या कहूँ…
अब कहना जरूरी नहीं, समझना जरूरी नहीं
रिश्ता वही पुरान, शायद निभाना जरूरी नहीं
सोंचता हूँ मैं गलत हूँ शायद
पर तुमसे क्या कहूँ…
कुछ बात दबी सी है जहां में, कुरेदना जरूरी नहीं
हर बार मैं ही गलत हूँ ,ऐसा तो जरूरी नहीं
सोंचता हूँ मैं गलत हूँ शायद
पर तुमसे क्या कहूँ…
दिल अब बस धड़क रहा है, जिंदा हो जरूरी नहीं,
जिंदा हूँ जी रहा हूँ, खुश हूँ ये जरूरी नहीं
सोंचता हूँ मैं गलत हूँ शायद
पर तुमसे क्या कहूँ
पर तुमसे क्या कहूँ…
By Anurag Nigam

Comments