Tumhara Aana
By Rachana Rajasthani
तुम जब सामने आते हो
मैं पागल सी हो जाती हूँ
कहना सुनना सब भूल कर
तेरी आँखों में खो जाती हूँ
तुम जब सामने आते हो
धीरे धीरे फ़िर जब तुम
मेरी और कदम बढ़ाते हो
उखड़ने लगती है सांसे मेरी
ज़ोर ज़ोर से दिल धड़काते हो
तुम जब सामने आते हो
जब प्यार से मुझे छूते हो
मैं मछली सी तड़प जाती हूँ
कहना कुछ और ही चाहती हूँ
कह कुछ और ही जाती हूँ
तुम जब सामने आते हो
जाने क्या हाल कर जाते हो
शर्म से लाल कर जाते हो
झुकाती हूँ नज़रें शर्मा कर तो
पलकों पर चुम्बन सजाते हो
तुम जब सामने आते हो
काजल निकाल कर मेरी आँखों से
मुझे काला टीका लगाते हो
कितनी फुर्सत से बनाई गई हूँ मैं
यूं आँखों आँखों में बतलाते हो
तुम जब सामने आते हो
एक मुस्कान से करते हो दवा मेरी
हर मर्ज़ दूर भगाते हो
कभी हँसते हो मेरी नादानियो पर
कभी प्यार से चपत लगाते हो
तुम जब सामने आते हो
कितने ही अनकहे वादे तुम
बिना कहे कर जाते हो
उस एक लम्हे में जैसे
पूरी ज़िंदगी दे जाते हो
तुम जब सामने आते हो
हाथों को लेकर हाथ में
जब अपने पास बिठाते हो
मेरी उलझी उलझी लटों को भी
उँगलियों से सुलझाते हो
सुनते हो मेरी सब बातें
कुछ अपनी भी सुनाते हो
मेरा रोना हँसना लडना झगड़ना
सब सर माथे लगाते हो
तुम जब सामने आते हो
फिर कस के जब तुम मुझे
अपने सीने से लगाते हो
सिमटी सहमी शर्मायी मैं
तुम आलिंगन में छुपाते हो
और ठुड्डी पकड़ के धीरे से
मेरा सर ऊपर उठाते हो
चूमते हो माथे पर मुझे
मेरे गालों को सहलाते हो
तुम जब सामने आते हो
फिर धीरे से होठों को अपने
यूँ कानो के पास तुम लाते हो
कान्हा की मुरली की धुन पर
प्रेम का राग सुनाते हो
बिखरने लगती हूँ बाहों में तुम्हारी
मेरी सुध-बुध ही ले जाते हो
एक एक पल फ़िर कैसे संभालूं
मेरी बैचेनी बढ़ाते हो
धक धक धक धक
धक धक धक धक
धड़कनें तेज़ भगाते हो
तुम जब सामने आते हो
फ़िर लंबी सी खामोशी टूटती है
जब धड़ाम की आवाज़ गूंजती है
और फ़िर से एक बार मैं बिस्तर से गिर जाती हूँ
हर बार की तरह इस बार भी बस
तुमसे सपनों में मिल पाती हूँ
फ़िर अगली रात
तुम जब सामने आते हो
मैंफिरपागलसीहोजातीहूँ
By Rachana Rajasthani

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