Tum Basey Ho
By Abhay Kr. Gaur
तुम बसे हुए हो किसी की दुआओं में
तुम बसे हुए हो किसी की दुआओं में
तुम्हारा ही ज़िक्र है इन हवाओं में
तुमसे एक अदद मुलाकात की है चाह
तुम पे ही होती है ख़त्म किसी की हर राह
पर तुम नहीं होते हर किसी को नसीब
दूर हो के भी सबसे कितने हो सबके करीब
ये ख़्वाब जिस दिन भी बन जाये हकीक़त
मुक़म्मल हो जाये ज़िन्दगी की अक़ीदत
पर अभी सामने है एक तन्हा इन्तज़ार
हर एक पल है मानो जैसे सदियां हज़ार
By Abhay Kr. Gaur

Good one
Nice
Nice work