Tujhko Bhula Na Paye Hai.n
By Sohail Khan Sohil
कुछ समझ आता नहीं, क्युं दिल मेरा नादान है,,
बिन तेरे आख़िर ये मेरी, जिंदगी वीरान है!
तुझको भुला न पाए हैं, तुझको भुला न पाएंगे, बिन तेरे जी पाएंगे, न बिन तेरे मर पाएंगे..!!
मतलबी है तू, भला कैसे मुझे तू समझेगा,,
रुख जिधर होगा हवाओं का, उधर ही बदलेगा!
पहले पाना फिर पछताना, ये तो मेरी क़िस्मत है,,
तेरे लिए पाना-खोना, तो महज़ इक फितरत है!
तुझको भुला न पाए हैं, तुझको भुला न पाएंगे, बिन तेरे जी पाएंगे, न बिन तेरे मर पाएंगे..!!
तेरे लिए हर एक ग़ज़ल, और मेरे अश्आ़र हैं,,
तेरा ही गर ज़िक्र न हो, मेरी ग़ज़ल बेकार है!
तुमने जो धोखा दिया, इसलिए कुछ लिख रहा,,
वरना इस नाचीज़ को, क्या भला मा़लूम था!
तुझको भुला न पाए हैं, तुझको भुला न पाएंगे, बिन तेरे जी पाएंगे, न बिन तेरे मर पाएंगे..!!
By Sohail Khan Sohil

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