Toota Hausla
By Anurag Nigam
टूटा सा है हौसला ,जज्बात अब बचे नहीं,
कि अब खामोश से हैं लब मेरे, अल्फाज अब बचे नहीं...
सोंचता मैं, रुकता मैं , रुकता मैं, सोंचता मैं
बहते आंसुओं की धार को खुद से ही पोंछता मैं
शमा है अब जली हुई , धुनि से हूं लिपटा मैं
अग्नि सा धधकता मैं ,अंगार अब बचे नहीं
कि अब खामोश से हैं लब मेरे, अल्फाज अब बचे नहीं...
वक्त है सख्त, हालात गर्दिश में लिपटे हुए
शाम, रात, भोर, है चारों पहर सिमटे हुए
और देखता हूं मैं झाँककर अपने मुस्तकबिल में तो
सपने हैं टूटे पड़े , हौसले अब बचे नहीं
कि अब खामोश से हैं लब मेरे, अल्फाज अब बचे नहीं...
अल्फाज अब बचे नहीं, अल्फाज अब बचे नहीं.....
By Anurag Nigam

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