The Hidden Feelings.
By Karan Kaushik
अपना हाल ए दिल तुमको सुनाऊँ कैसे
क्या महसूस करता हूँ मैं बताऊँ कैसे
झूट के पीछे छुपने की ऐसी आदत लगी है
तो अपना सच मैं तुमको दिखाऊँ कैसे।
किसी अपने की ज़रूरत मुझे भी लगती है
पर किसी को अब अपना बनाऊँ कैसे
किसी पे एतबार मेरा दिल भी करना चाहता है
पर उतना भरोसा किसी पे जताऊँ कैसे
भीड़ में कहीं अजनबियों से मुझे भी मिलना है
पर ये अपनो की दी हुई तनहायी मिटाऊँ कैसे
किसी के क़रीब जाने को मेरा भी जी चाहता है
पर ये जो खुदसे भी दूरियाँ है उन्हें मिटाऊँ कैसे
जी भर के रोने का मेरा भी दिल करता है
पर चेहरे की झूठी मुस्कान छुपाऊँ कैसे
किसी को गले से लगा कर बस सो जाने का मन करता है
पर जुदाई की नींद से ख़ुद को पहले जगाऊँ कैसे
जो दर्द मैं महसूस करता हूँ
उसे बीन कहे तुम्हें सुनाऊँ कैसे
तुम अपनी ज़िंदगी में मग्न हो
तुम्हें अपनी ज़िंदगी के क़िस्से सुनाऊँ कैसे
अपना हाल ए दिल तुमको सुनाऊँ कैसे
क्या महसूस करता हूँ मैं बताऊँ कैसे।
By Karan Kaushik

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