Talash
Updated: Jul 4, 2025
By Shipra Sachdeva
एक तलाश में हम,
पूरी सादिया गुज़ार देते हैं ,
अपनों की ख़ुशी में,
खुद को भुला देते हैं,
सबको खुश करने में,
ये जो जीवन लगा देता है,
क्या कसूर है इसका,
जो हम खुद को ही भूला देते हैं?
अपने सपनो को कैद करके,
एक कोने में दफना देते है,
सबकी उम्मीदों में
अपनी ख्वाइशऐ दबा लेते है ,
क्या कसूर है इसका
जो हम खुद को भुला देते है ।।
एक पल जीते है,
एक पल मरते है,
सब दिल में दफना लेते है,
क्या कसूर है अपना जो
खुद को भुला देते है ।।
अपनी खुशी की तलाश में
हर भगवान को मना लेते है,
सुकून के वो चार पल वही से
चुरा लेते है,
सबकी उम्मीदों में अपनी तो जगह बना लेते है,
खुद को भुला कर अपनों को मना लेते है,
क्या कसूर है इसका जो हम खुद को भुला देते है।।
जिम्मेदारियों का एहसास,
अपनों के साथ के खातिर,
अपने आप को ही रुला लेते है,
दिल में छुपे कही जज्बातों को दिल में ही दबा लेते है,
क्या कसूर है अपना के हम खुद को ही भुला देते है।।
अपनी ही तलाश में,दर दर भटकते है,
खुद से मिलने के लिए ,खुद से ही उलझते है,
एक पल जब अपने हिसाब से जीने को कोशिश जब करते है,
कही बार गिरते संभालते है ,
अपनी ही तलाश में,कुछ अपने रिश्ते तक गवाह देते है,
क्या कसूर है अपना की हम खुद को ही भुला देते है ।।
By Shipra Sachdeva

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