TAALIB
By Dr. Imran A.K. Surti
मुतमईन होकर जीने में मज़ा क्या है,
ज़िन्दगी में इससे बड़ी सज़ा क्या है!
तू तालिब है, तुजे तेरा हुनर मालूम है,
फिर क्यों औरों से पूछता है,
जीने की वजह क्या है!
तुजे खुदा ने अक्ले-सलीम बख़्शी है,
इससे बड़ी दौलत-ए-दुनिया क्या है,
फिर भी औरों से पूछता है,
भला क्या है, बुरा क्या है!
हसरत और हैरतभरी निगाहों से,
लोग देखते हैं मुझे आजकल,
या रब तू ही बता,
आखिर ये मांजरा क्या है!
इमरान सुरती 'इमरोज़'
By Dr. Imran A.K. Surti

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