Sunne Wale
By Karan Bardia
आज कल ऐसा क्यों लगता है कि सुनने वाले कम हो गए हैं,
वो शांति से आपकी बात, आपके जज़्बात समझने वाले कहीं खो गए हैं,
इतनी हो गई है ये दुनिया,
के बेवज़ह और बिना अपना मतलब सोचे बात सुनने वाले लोग कहीं गम हो गए हैं।
हज़ारों लोग मुझे जानते हैं और हज़ारों को मैं जानता हूँ पर जब किसी से बात करनी हो तो सोचना पड़ता है,
बेधड़क बेख़ौफ़ कुछ भी कहने से खुद को रोकना पड़ता है,
इतनी ख़राब और ज़ालिम हो गई है ये दुनिया,
कि अब तो अपने माता पिता से भी बात करने से पहले सोचना पड़ता है।
शांति से बात सुनने के लिए लोगों को आजकल वक्त ही नहीं मिलता है,
अगर उसके मतलब की बात हो तो ठीक वरना कोई भी उससे तारीख से नहीं सुनता है,
अरे यार क्या बस कोई सिर्फ़ सुन नहीं सकता है मेरी बात, हमेशा यही सोचता हूँ,
शायद हर कोई जैसा हम चाहे वैसा नहीं समझता है।
इस कदर कम हो गए हैं सुनने वाले की ऐसे लग रहा है मानो हर कोई सिर्फ़ बोल रहा है,
मेरी बात पहले ख़त्म हो जाये इसी रेस में हर कोई दौड़ रहा है,
ऐसा लग रहा है जैसे सुनने की शमता, सुनने का सब्र खत्म हो गया सबके अंदर,
बस अपनी बात, अपने जज़्बात, अपने हालात सुनाने को हर कोई एक सुनने वाला ढूंढ रहा है।
क्या इतना मुश्किल हो गया है सिर्फ़ सुनना,
बिना किसी मतलब के बिना किसी स्वार्थ के बस साथ रहना,
यार, इस कदर परेशान हो गया हूं, इस एक तरफ़ वाली दुनिया से के मैं सोचता हूं,
क्या इतना मुश्किल हो गया है आज कल किसी का बस हाथ थाम कर उनके साथ रहना।
By Karan Bardia

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