Sochh Sabki Bati Hui Si
- Hashtag Kalakar
- Jan 7, 2025
- 1 min read
Updated: Jul 11, 2025
By Prashant Sachan
सोच है सबकी बटी हुई सी,
पर हर तरकश में कुछ ना कुछ है,
कोई आगे चलकर खुश है,
कोई पीछे चलकर खुश है।
सेहमी हुई सी डरी हुई सी,
कुछ दिखी कुछ छिपी हुई सी,
भूली हुई सी बिसरी हुई सी,
वो हसीं वो ख़ुशी
कोई दिखाकर खुश है,
कोई छिपाकर खुश है।
मन मे कुछ शब्द दबाकर,
किसी से कुछ ना बताकर,
मन मे मन ही को छिपाकर,
कोई सामने आकर खुश है,
कोई परदे के पीछे खुश है।
By Prashant Sachan

Comments