Single Piece
By Mridul Krishna Tripathi
लोग हमे छोड़ कर हमारे जैसों को आजमाए जा रहे है
जमाना बदल रहा है
घासों को काट कर गलीचे भी घासवाले लगाए जा रहे है।
कहती थी तुमसा कोई मिल नहीं सकता
तुम single piece बने हो
आज हमारी जगह भोसडीवाले लाए जा रहे हैं।।
By Mridul Krishna Tripathi

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