Shwet Bhed
Updated: Aug 2, 2025
By Sameer Parashar
किसके पांव में मखमल हाज़िर,
कौन चुनेगा दलदल ही ।
कौन रहेगा संभला संभला,
कौन रहेगा पागल ही ।
किनकी रातें चटक चांदनी,
किनके दिन भी काजल ही ।
कुछ के दिल में खुदा का आंचल,
बाकी के दिल मक्तल ही ।
शमशीरों की इश्क की गाथा,
गूंजी जंगल जंगल ही ।
उन जंगल के पेड़ को देखो,
आखिर सारे बे–फ़ल ही ।
कुछ रिश्तों की ज़ात न पूछो,
बातें लहज़े अव्वल ही ।
खुशबू भी अब मौत लपेटे,
सांपों के दिल संदल ही ।
By Sameer Parashar

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