Saz E-Ishq
By Zainab Betmawala
जब दिल टूटता ही ना तो यकीन मानो बहुत दर्द होता है।।।
या रब!!
सारी कायनात का दायरा मुकर्रर करके ,
क्यूं इश्क़ को हद से बाहर जाने को रजा दे दी।।।
कोन कहता है वक्त सारे ज़ख्म भर देता है?
ये ज़ख्म ए इश्क़ है जनाब!
वक्त का मरहम यहां काम नहीं आता।।।।
कोन कहता है इश्क के बदले कुछ नही मिलता,,
हमे तो मिला है धोखा हो सही।।।
तू सलामत है क्योंकि,,, बेवफ़ाई की कोई सजा नही,,,
मैने तो इश्क़ किया है न,,,,अब सजा तो मुझे मिलेगी।।।
इश्क में मार मिटने को तो हम भी तैयार थे,,
पर ख्वाहिश तो तेरे साथ जीने की थी।।।।।।
वो आए भी तो समेटने मुझे
मैने भी कह दिया
टूटा हूं सिर्फ
अभी बिखरा नही हूं मैं।।।।।
तुझमें कहीं खो सी गई थी मैं
अब!!!
खुद को खुद में ढूंढना है मुझे।।।।
By Zainab Betmawala

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