Samay
By Riya Singla
किसी के पास समय ही समय है,
किसी के पास एक क्षण भी नहीं,
किसी ने दुनिया में जन्म लिया है,
कोई अंतिम सांसें गिन रहा है,
कोई भाग रहा है चीते की गति,
तो कोई ठहरा है कछुए की भांति,
किसी के पास काम है फुर्सत नहीं,
कोई अनाड़ी फिरता है नदियों में पत्थर मारता कहीं,
कोई रात-रात भर जाग रहा है,
तो कोई दिन भर सो रहा है,
कोई हर मामले में दखल देता है,
तो कोई काम की बात भी नहीं सुनता है,
कोई दूसरों की कमियों गिनने में लगा है,
तो कोई खुद को संवारने में लगा है,
कोई टीवी मोबाइल पर अजनबियों को निहारता है,
तो कोई अपने घरवालों की कामयाबी की बातें भी नहीं करता है,
कोई बहुत प्यारा है ऊपर से पर दिल से पत्थर,
कोई उलटे तवे जैसा है पर दिल से हीरा,
कोई किसी को गिराने में लगा है,
तो कोई किसी को दिखाने में,
कोई भागता-भागता रुक जाता है,
तो कोई रुकता-रुकता भाग जाता है,
कोई बाहर सब से प्यार जताता है पर घर पर अपनों को सताता है,
कोई बोलता बहुत ज़्यादा है पर डक्का भी नहीं तोड़ता है,
कोई ऐश में है तो कोई नशे की कैद में है,
कोई मेहनत की खाता है तो कोई मुफ्त की चबाता है,
कोई महलों में रोता है तो कोई झोंपड़ों में भी हंसता है,
कोई किसी से जलता है तो कोई किसी से फ़लता है,
कोई मार खाता है तो कोई आंख दिखाता है,
कोई दूसरों पे जाने देता फिरता है तो कोई अपनी ही जान लेता सड़ता है,
कोई गौ माता में देवता देखता है तो कोई उनसे पैसे और काम ऐंठता है,
कोई उनकी सेवा करता है तो कोई उनको बेवा करता है,
कोई खुद को साबित करने में लगा है तो कोई खुद को प्रताड़ित करने में लगा
है,
किसी को प्रेम के गीत गाने हैं तो किसी को बीच नफ़रत और ताने लाने हैं,
किसी की प्यारी नींद लटक गई तो किसी की ट्रेन जींद अटक गई,
कोई भगवान को गाली देता है तो कोई सोने की बाली देता है,
कोई भंग चढ़ा है तो कोई रंग चढ़ा है,
ये घोर कलयुग है भाईसाहब , यहाँ यमराज तक अपने काम छोड़ सबके पीछे
पड़ा है।
By Riya Singla

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