Sabhi Log Ruthe Hai Mujhse
Updated: Oct 2, 2024
By Omkar Santosh Phadke
यह संवाद मेरे और मेरी उम्मीद के बीच का है |
सभी लोग रूठे हैमुझसे, तुम बातें करने आओगी क्या ?
सददयोंसें घेरे हैग़म के बादल, ककरन खुशी की लाओगी क्या?
सभी लोग रूठे हैमुझसे, तुम बातें करने आओगी क्या ?
नसीब भैया देखत भी नाही, खुशी बहना भी गुमसुम है,
हौसला कोने में बैठा रोता है, कुछ उसका जी बहलाओगी क्या ?
सभी लोग रूठे हैमुझसे, तुम बातें करने आओगी क्या ?
हैंररश्ते नाते लापता सब, ज़िम्मेदारी सेठ वसलु ी पर है,
यारी डुब रही पैसों में, बस उसकी जान बचाओगी क्या ?
सभी लोग रूठे हैमुझसे, तुम बातें करने आओगी क्या ?
साहस ने नाता तोड ददया हैं, ववश्वास भी तुम बबन जी ना सका,
हुनर को जैसे तैसे थामे हुुँ, आकर उसको समझाओगी क्या ?
सभी लोग रूठे हैमुझसे, तुम बातें करने आओगी क्या ?
ऐतबार को मैंझुठा लगता हुुँ, सुकून का ददल भी टुुँटा हैं,
ऐब भी सारे छोड गयें अब, ज़िंदगी ने ऐसे लुटा हैं,
धडकन बस अब तक जारीं है, शायद अब उसकी बारीं हैं,
ए उम्मीद, बस एक दफा, आकर उसको छूुँ जाओगी क्या ?
सभी लोग रूठे हैमुझसे, तुम बातें करने आओगी क्या ?
By Omkar Santosh Phadke

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