Sab Hote Dekha Hai
By Anurag Nigam
इस दुनिया में सब होते देखा है
रात भर जागकर सुबह होते देखा है…
चोटी उम्र में खुद को बड़ा होते
ख्वाबों को इक छोटी चादर मे समेटते
खुद को टूटते बिखरते और फिर निखरते
इतना ही नहीं, बिना आँसुओं के फूट फूट के रोते देखा है
इस दुनिया में सब होते देखा है
रात भर जागकर सुबह होते देखा है…
कभी बेवजह खिलखिलाकर हँसते
कभी खुद को भूख रखके
वो चीज अच्छी नहीं की तालीम देकर
ख्वाहिशों को खुद ही मारते देखा है…
इस दुनिया में सब होते देखा है
रात भर जागकर सुबह होते देखा है…||
By Anurag Nigam

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