Ruk Na Jana Kahin Tum.....
By Shraddha
रुक न जाना कहीं तुम, जीवन में हार के,
आते हैं हर पतझड़ के बाद, मौसम बहार के
रुक ना जाना कहीं तुम जीवन में हार के….
मुश्किलें और हादसे भी, है एक नाम जिंदगी का,
पर हमें जीना है जीवन, हर मुश्किल को मार के
रुक ना जाना कहीं तुम जीवन में हार के…
हसरतें दिल् में रहें और हौसला सीने" तो में हो,
मिल जाएंगे हर मकाम, हमें हर सरहद के पार के
रुक ना जाना कहीं तुम जीवन में हार के…
जिदंगी को जिदंगी का, नया नाम हम दे सकें,
फैला दें खुशियाँ, हर तरफ, ज्यों उत्सव त्यौहार के
रुक ना जाना कहीं तुम जीवन में हार के…
मिटा दो अपनी हस्ती को, जहाँ में प्रीत बढ़ाने को,
दुनिया को रंग दे दो, खुद दुनिया से हार के
रुक ना जाना कहीं तुम जीवन में हार के…
By Shraddha

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