RECAP
By Vikas Kumar
मैं गुम शुम तन्हा लड़का था, आंखो में बस तन्हाई थी।
कुछ यादें थी और सपने थे, बीते दिनों की परछाई थी।
कभी इश्क़ ने दस्तक दी थी यहां, उसे संभाल भी पाया था कहां।
इक याद बसर करती थी यहां, बस इतने हीं थे मेरे दोनों जहान।
मेरे आंखो के अंदर तक, तब तुमने हीं तो झांका था।
इन जख्मों के गहराई को, तब तुमने हीं पहचाना था।
फिर तुमने हीं तो इस दिल के, अरमानों को आबाद किया।
फिर तुमने हीं तो इस दिल के, वीराने को शादाब किया।
फिर ख्वाबों ने अंगराई ली, इस दिल ने धड़कना शुरू किया।
फिर सांसों के तकरारों से, इस दिल ने मचलना शुरू किया।
तेरे गुदाज़ बाहों ने, मुझे जीना फिर से सीखा दिया।
तेरे होठों के प्यालों ने, मुझे अमृत फिर से पिला दिया।
मैं जीना सीख के खुशियों से, तेरे सांसों में खोया था।
अमृत के प्याले को पी कर, इन बाहों में हीं सोया था।
वो सुबहें कितनी प्यारी थी, वो रातें कितनी दिलकश थी।
तेरे पलकों पर मेरे लबों से सजी, वो शामें कितनी मयकश थी।
By Vikas Kumar

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