Raat Tu Kyon Udaas Hai
By Dr. Tara Nigam
रात तू क्यों उदास है, क्या तुझे भी मेरे दर्द का एहसास है
यूँ तो तनहा हम तुम हैं, फिर भी जीने की एक आस है
तनहा रह कर मैंने, खुद को थोड़ा जाना है
जाना खुद की प्रतिभा को, और कमजोरियों को पहचाना है
यूँ किसी पर निर्भर होकर, खुशियाँ ढूँढ़ना ठीक नहीं
खुद से बेहतर हमारा, सच में कोई दोस्त नहीं
ऐ रात यूँ ना ग़मगीन हो, तेरी खूबियाँ भी असीम हैं
तुझ संग वक़्त बिताने को, रहते सब अधीर हैं
सागर सी तेरी गहराई, ऊपर से शिथिल बैठी है
ना जाने कितनी तन्हाइयों के, राज़ छुपाये बैठी है
कई हैं तेरे चाहने वाले, ऐ रात तू भी खुश होजा
थक गयी होगी सबको संभालते, आ मेरे संग तू भी सोजा
By Dr. Tara Nigam

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