Raat Sunehare Sapno Wali
By Makarand Vinayak Phadke
जब देर शाम को ख़यालों में
तस्वीर किसी की छाती है
चेहरे की बढ़ती रौनक
ये एहसास दिलाती है
के ख्वाबों की दुनिया से
रात सुनहरे सपनों वाली
धीमे-धीमे आती है,
मिलने को तरसे हम उनकी
यादें सुहानी जगाती है
सिर्फ आहट भर से उनकी
ये धड़कन का नूर बदल जाता है
हाये क़यामत ही आती है, जब
आंखों को “वो” नज़र आता है
सुबह गुजरी रात के साए
आंखों में थे झिलमिलाए
बस मिल जाये कोई हसीं
दिल पे हुकूमत करने वाली
मिला करें हम जब भी आए
वो रात सुनहरे सपनों वाली
By Makarand Vinayak Phadke

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