Raahgir aur Raah
By Abhay Kr. Gaur
ना जाने ये कैसी अजब रवायत है?
राहगीर को खुद राह से ही शिकायत है
चलते रहने का यूँ तो करते हैं वादा
तिल तिल के मर जाता है कोशिश का इरादा
है वो खुशकिस्मत जिसे दिख जाये रास्ता
कदमों का मंज़िल से है गहरा वास्ता
तू दिन रात चलता रहे ये ज़रूरी तो नहीं
चलते रहना तेरा फर्ज़ है, मजबूरी तो नहीं
मजबूर हो के अगर तू इसी तरह चलता रहेगा
तेरी खुशियों का सूरज साँझ से पहले ही ढलता रहेगा
By Abhay Kr. Gaur

Nice message
Good one
उम्दा बहुत सुंदर