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Paheli

Jan 5, 2024
2 min read

Updated: Jul 21, 2025

By Karan Bardia


वो एक ऐसी पहेली बन गई है जिसे वो खुद ही सुलझा रही है,

अपना दर्द खुद समझकर खुद ही को समझा- बुझाकर सुला रही है,

बताना चाहती है वो जो उसके अंदर बसा है उस एक इंसान को,

पर ना जाने क्यों वो चाहकर भी कुछ बता नहीं पा रही है।


इतना दर्द है उसकी आँखों में मन करता है हर दर्द खींच लूं,

ज़ख्म इतने है उसके दिल में कि देख नहीं पाऊंगा इसलिए अपनी आंखें मीच लूं,

अकेली ही गई है वो जो मुझे दिख रहा है इस दुनिया में,

मन करता है बस उसके पास जाऊं और उसे अपनी बाहों में भींच लूं।


दुसरों में जीना आदत है उसकी,

खुद से पहले अपनों को रखना बहुत बड़ी हिमाकत है उसकी,

सब दर्द झेल कर भी सिर्फ़ प्यार करना आता है उसे,

ये कैसे बताऊं इसे की यही तो सबसे बड़ी ताक़त है उसकी।


कभी खुदकि हालत को देखती नहीं,

वो खुद कितनी खूबसूरत है आएने में देखकर कभी खुद से कहती नहीं,

मेरे लिए तो जन्नत की परी है वो,

पर वो कभी खुद को महत्व नहीं देती।


हाये वो उसकी बिंदी और उसके नाक का कांटा,

हाय वो प्यारी आँखें मैं तो नज़र ही नहीं हटा पाता,

कैसे समझाऊं कैसे जताऊं कितना प्यार करता हूं उससे,

उसके सामने तो मैं कुछ बोल ही नहीं पाता।


खुदको उसकी नज़रों में बसाऊँ कैसे जैसे वो मेरी नज़रों में बसी है,

दिल की धड़कन किस तरह बढ़ गई है मेरी जब भी वो मेरी सामने बस ज़रा सी हसी है,

अब तो बस उसे बताना है उसके लिए भी किसी के होने का एहसास करवाना है,

शायद यही मेरी ज़िंदगी का लक्ष्य है और शायद इसीलिये उससे मेरी बातें बढ़ीं हैं।


कि आँखों में कयामत के लिए लोग भी भला खुद को कोसते हैं क्या,

खुद ही हर रोज खुद की असुरक्षाओं को नोचते हैं क्या,

कितना भी अच्छा हो यार कोई,

कभी दूसरे के दुख के लिए अपने आप को कोसते है क्या।


उसकी दोस्ती का कर्ज़ चुकाते उम्र बीत जाएगी,

शायद जंग- ए - मोहब्बत वो जीत जायेगी,

ये दुआ है मेरी कि वो जो चाहे उसे मिल जाए,

तब शायद वो एक बार ही सही मन से खुश हो जाएगी।


उसका हर गम बस चूरचुर हो जाए,

आंसु उसकी आँखों से बिल्कुल कोसों दूर हो जाये,

बस हंसे और मुस्कुराए वो,

और उसकी ज़िंदगी खुशियों से भरपुर हो जाये।


तू सुनो मेरी बात, तुम बहुत कमाल हो,

बिखरे हुए बालों में तो मानो बिलकुल बवाल हो,

मन होगी तुम अलग सबके लिए,

पर तुम अलग हो इसलिए तो पूरी दुनिया के लिए तुम एक मिसाल हो।


क्यों दर्द को घेरे तू पूरी रात सोती नहीं है,

क्यों अपनी खामियाँ तू खोती नहीं है,

अरे वो होते हैं ना कुछ लोग जो अलग हट कर होते हैं,

मेरी ये दोस्त भी ऐसी ही है शायद इसीलिये वो रोती नहीं है।


By Karan Bardia



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