Naari ( women)
By Peeyushi Jha
फिर एक नारी रोयी है,
चीखी है चिल्लायी है
तड़पी है वो बार बार
जीतेगी या होगी हार,
जनता है बस देख रहा,
नेता अपनी रोटी सेक रहा,
वोतो जल हो गयी है राख,
कब तक सेहना है ये वार,
कलयुग का है कृष्ण कौन
दुर्योधन कौन दुशाशन कौन,
धृताराष्ट्र बना जमाना है,
पर तुझे गांधारी नहीं बनाना है,
उठ खड़ी हो कर प्रहार,
खुद ही तुझे बचाना है,
अब डरना नहीं डराना है,
देखा नहीं किसी ने जो,
महाभारत वही दिखाना है,
बचा ले अपना चीर हरण,
हाथ ज़ोर नहीं गिरगिराना है,
काली बन कर के संहार,
लक्ष्मी बन तलवार उठाना है,
नारी, तुझे बस यही दिखाना है.
By Peeyushi Jha

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