"Muskaan"
By Khushbu Khetawat
हर बार जब वो मीठी सी आवाज़ शोर माई से सुनै देती थी
वो मुस्कुराये
जब भी उनका ख्याल मन मन आकर धबधबते थे
वो मुस्कुराये
हर बार जब उस आसमान में वो एक तारा चमकता था
वो मुस्कुराये
जब भी उस भाग दुआ में वो चलकर आते थे
वो मुस्कुराये
मुस्कुराने की वजह थी एक
ये सोच कर मुस्कुराएं कि वजह थी एक ये ना सोच कर की एक ही वजह थी
उनके होते हम मुस्कुराने की वजह खोज नहीं पाते थे
उनकी मुस्कान माई ही मिल जाती थी
पर इंतज़ार के साथ-साथ
लम्हों में बदली वो मुस्कुराहट
क्योंकि उसकी मुस्कान की वजह थी कोई और
अब वापस खोजी पड़ी वो ही मुस्कुराहट
बिना उस मुस्कान के…
By Khushbu Khetawat

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