Mohobbat Ka Zariya
- Hashtag Kalakar
- Jan 10, 2025
- 1 min read
Updated: Jul 14, 2025
By K Tarun
सच्ची मोहब्बत को छुपाओ ना सनम,
कि झूठ तुम पर नहीं जचता।
अभी तो मान जाओ सनम,
अधूरा प्यार कभी नहीं पछतता।
लिखते-लिखते इस कविता को रो दिए हम,
ज़रा गौर फरमाओ,
हमारे लिखने का ज़रिया है ये ग़म।
By K Tarun

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