MERI MAA
Updated: Oct 8, 2022
By Dr. Imran A.K. Surti
नूर का ज़रिया थी वो - मेरी माँ,
केहने को दरिया थी वो - मेरी माँ!
ओस की बूँद थी वो - मेरी माँ,
मेरी गहरी नींद थी वो - मेरी माँ!
पत्तों की ढ़ाल थी वो - मेरी माँ,
लहू से भी लाल लथि वो - मेरी माँ!
खुदा का मेरे मो'जिज़ा थी वो - मेरी माँ,
खुदा ने जो दी जज़ा थी वो - मेरी माँ!
सुकून-ए-जन्नत थी वो - मेरी माँ,
दुआ-ए-मन्नत थी वो - मेरी माँ!
परिंदे की परवाज़ थी वो - मेरी माँ,
किरदार की सरफ़राज़ थी वो - मेरी माँ!
दरवेश की दुआ है वो - मेरी माँ,
फ़ना होकर बक़ा है वो - मेरी माँ!
By Dr. Imran A.K. Surti

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