Mera Ishq
By Anurag Nigam
सजदे में रहा सर मेरा, होंठों में तेरा नाम
इक तेरे सिवा कुछ न चाहा, चाहा तो तेरा साथ,
इक तू ही है मेरी चाहत में, अब कुछ और न
क्या सोचूँ, क्या करूँ ,समझ न आए कोई काम
इश्क, हाँ जी इश्क ही हुआ है बेशक
तुम समझो या न समझो, बस यही मेरे चारों धाम
लिखूँ तुझे, पढ़ूँ तुझे, इक तक लगा देखूँ तुझे
अपना लिखा मिटा दूँ सब, बस लिखूँ तेरा नाम…||
By Anurag Nigam

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