MERA GAON
By Dr. Imran A.K. Surti
वह गांव पुराना अच्छा था,
वह दौर पुराना सच्चा था,
जब बरगद के साये तले,
बचपन बीता करता था,
जब पेड़ों की शाखों में,
कोई गीत मद्धम बजता था,
वह गांव पुराना अच्छा था,
वह दौर पुराना सच्चा था!
जब आज़ाद परिंदों की,
परवाज़ देखा करता था,
खेतों और खलिहानों में,
लहू धान बनके उगता था,
वह गांव पुराना अच्छा था,
वह दौर पुराना सच्चा था!
जब रंगों का बंटवारा न था,
कोई बेबस, बेसहारा न था,
जब सियासी वफादारी न थी,
बेहयाई, बेरवादारी न थी,
वह गांव पुराना अच्छा था,
वह दौर पुराना सच्चा था!
जब गांव के चौपालों पे,
बूढ़ों का डेरा रहेता था,
जब बुर्ज़ुर्गों की दुआ जैसा,
बादलों से पानी बरसता था,
वह गांव पुराना अच्छा था,
वह दौर पुराना सच्चा था!
जब तहज़ीबों की रिवायत थी,
और आलिमों की हिदायत थी,
खुदा के करीब मोहब्बत है,
वही सबसे उम्दा इबादत है,
वह गांव पुराना अच्छा था,
वह दौर पुराना सच्चा था!
जब इंसानों की बस्ती में,
फरिश्तों का क़याम रहेता था,
माँ-बाप की फरमाबरदारी थी,
और खुदा का ज़िक्र रहेता था,
वह गांव पुराना अच्छा था,
वह दौर पुराना सच्चा था!
By Dr. Imran A.K. Surti

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