Man Marudhara Ki Aandhi
By Apurva Ghorawat
मरूधरा में खूब चलती है आंधी
मेरे मन में यूं मचलती है आंधी॥
तेज हवाओं संग धूल लहराती
आवरण सम सर्वत्र छा जाती
उर में बवंडर समाये
बेजुबां होकर भी बयां कर जाती ॥
परिंदों की नींदें उड़ा जाती
अधूरे सपनों को हवा दे जाती
आकाश छूने की ख्वाहिश जगाती
उड़ने को नयी दिशाएं दिखा जाती
होसलों को हिम्मत दे जाती ॥
बेतहाशा तड़पती है थमने को
दौड़ती - भागती सुकून पाने को
गन्तव्य तक निरन्तर गतिशील रहती
मंजिल पा कर ही शांत होती॥
भीतर की ज्वाला जब बरस जाती है
कभी घरौंदा उड़ा ले जाती
कभी बिछड़े तिनकें जोड़ जाती
कभी बारिश बन तृप्ति तो कभी बंजर बना देती॥
मरूधरा में खूब चलती है आंधी
आधी रात में भी यूँ मचलती है आंधी…..
By Apurva Ghorawat

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