Mahabharat
Updated: Aug 28, 2025
By Abhishek Kumar
स्वप्नो की बालू मिट्टी मे, जब समय के पहिए धँसते है,
तो किसी निहत्थे कर्ण पर कोई अर्जुन बाण चलाता है ।
परिस्थितियों से अनिभिज्ञ कोई, रथ को उबारता हो अपने,
अवसर का लाभ उठा ले जो, वह विश्वविजयी कहलाता है ।।
जब धर्मविजय की आड मे छिप, बाणों की वर्षा होती है,
तो पर्वत सा भी भीष्म कोई, मृत्युशय्या पर बिछ जाता है ।।
कोई द्रोण सा अविजित भी मिथ्या बातों की बलि चढ जाता है,
विश्वास किसी पर बढकर जब अंधविश्वास हो जाता है ।।
जब भ्रात्रप्रेम की धरती पर, युद्ध भाई- भाई मे होता है,
अद्भुत है कैसे तब भारत में महाभारत हो जाता है ।।
By Abhishek Kumar

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