Maa, Jesa Koi Yun Hi Nahi Milta....
By Mayank Joshi
“ धरा पर, इश्वर का सबूत, यूँ ही नहीं मिलता,
कितना दर्द सेहना पड़ता है, माँ का वजुद, यूँ ही नहीं मिलता,
दरबार~ए~जन्नत सुना तो बहोत होगा,
लेकीन ज़मीं पर जन्नत का पता, यूँ ही नहीं मिलता।“
“ गरीबी चाहे कितनी, फिर भी वो बच्चों को पाले,
अपना निवाला भी उन्हे खिलादे, ये तो उनकी परवाह बताती है की फ़िक्र कितनी है,
वरना नासार~ए~तबीयत मे भी कोई घर सम्भाले, एसा शख्स, यूँ ही नहीं मिलता,
दवा के साथ कभी नज़रे~इबादत, का एहसास यूँ ही नहीं मिलता।“
“ ठोकर खा कर भी जो मुस्कुराय, छोटी कमाई मे भी जो घर चलाय,
एक एसा रिश्ता, जो समजो तो खामोशी मे समा जाय,
ख्वाब को हकीकत मे बदल दे, वो आँचल, यूँ ही नहीं मिलता,
घूम आओ चाहे पूरी कायनात, यार, माँ का दुजा स्वरुप नहीं मिलता।“
“ लेकीन बयान~ए~हक़िकत कुछ यूँ हो रहा है,
सब कुछ करने के बावजूद, आज वो शख्स, अपनो के ही प्यार को तरस रहा है,
अल्फाज़ नहीं है सिर्फ़ माँ, इनके नाम का एहतराम, यूँ ही नहीं मिलता,
कुछ भी करले माँ, लेकीन इन्हे कभी कोई खिताब नहीं मिलता।“
By Mayank Joshi

Comments