Live in the Present
Updated: Jul 29, 2025
By Karan Kaushik
क्या बचपन, क्या जवानी
सबकी यहाँ है कोई कहानी
बचपन में जवानी अच्छी लगती थी
अब जवानी में बचपन अच्छा लगता है
क्या कहने है हम इंसानों के
जो होता है जाने क्यूँ वो ही अधूरा लगता है।
थोड़ा वक़्त को उसी के अन्दाज़ में जीना सिख लो
जितनी ख़ुद सह सको किसी को सिर्फ़ उतनी ही तकलीफ़ दो
जो आज है वो शायद कल नहीं होगा
इसलिये पहल आज को तो जीना सिख लो
और जो बीत गया उसकी तो बात ही क्या है
बीते हुए को लेकर क्यूँ आज भी इतना जज़्बाती सा है
वो अच्छा बुरा सब जा चुका है
उसक फ़ायदे नुक़सान ज़िंदगी में तू पा चुका है
जो अभी है सिर वही सच है
ये वक़्त ही तेरा असली जेबख़र्च है
इसे थोड़ा सम्भाल के इस्तेमाल करो
इधर उधर की बातों में यूँ ना इसको बर्बाद करो
क्यूँकि ज़िंदगी में सिर्फ़ एक इसका हिसाब ही चुकाना है
ये पूरा हो जाये उससे पहले ही कुछ कर दिखाना है
तो जो खर्च हो गया उसकी परवाह अब करो नहीं
आज की जेभे ख़ाली कर तुम कल की अभी से भरो नहीं।
By Karan Kaushik

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