Laila Majnu
By Jeeshant Mathur (Shayak)
तू पारी कोई जन्नत कि, मैं आदम ए आलिम,
मिलाने वाला खुदा हैं, अलग करे दुनिया ज़ालिम
हासिल हो जाती तो तेरा क्या ही करता,
दर बदर बटकता तुझे लिए लिए फिरता
मैं पतझड़ में गिरा हुआ पत्ता,
तुम कली मौसम ए बहार कि,
तुम पहली कड़ी मोहब्बत कि
मैं आखिरी घड़ी इंतज़ार कि
मैं शराब से जला हुआ तार गले का
तू सुराई के जैसा आकर गले का
तुझे नाचू , तुझे झूमू
तुझे खेलू , तुझे छूलूं
नज़र चुराऊ फिर नज़र ना आऊ,
फिर दिखने लगू और दिखता ही जाऊं
मौलाना ए इश्क कहे सब मुझे,
कोई पुकारे हमे हाफिज ए जुनू
कोई ना आए इस जंगल में मुझसे रूठने
मैं अपने अक्स से जंग करू तेरी परछाई से मनू
तू आख़री रोशनी इस दुनिया कि,
मैं तेरा पीछा करता हुआ जुगनू,
तू खुदा सी पाक साफ लैला,
मैं तेरा वोही मैला कुचेला मजनू
अकेला सही मैं पागल सही
By Jeeshant Mathur(Shayak)

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