Kyuon Khokh Me Mar Di Jati Hain Betiyan?
By Sweta Kumari
जन्म से पहले ही बेटियाँ क्यों मार दी जाती है
आँख खुलने से पहले ही जीने का हक क्यों खो देती है
कहते हैं कि बेटियों से वंश चलाया नहीं जा सकता है
पर ये तो बताओ कि इनके बिना वंश कैसे बढ़ाया जा सकता है?
तुम्हें जरूरत है हर कदम पे एक औरत के साथ की
जीवन में आने के लिए सर्वप्रथम तो माँ के कोख की
जीवन का हर पहला पाठ तो माँ ही पढ़ाया करती है
तुम्हें खुश देखकर अपने सारे गम भूल जाया करती है।
फिर तुम्हारे नखरे उठाने बहनें आ जाया करती है
तुम्हारी सुनी कलाई की तरह घर-आँगन भी भर जाया करती है
एक तुम्हारी खुशी के खातिर पूरी दुनिया से लड़ जाती है।
आब बारी है पत्नी की जो सर्वस्व छोड़कर आती है
फिर तुम्हारे सुख-दुख में आजीवन साथ निभाती है
हिम्मत की जो बात करूँ तो तुम एक ही कुल चलाते हो
सराहनीय तो बेटियाँ है जो दोनो कुल के मान निभाती है।
रहा-सहा खालीपन भी एक नन्ही परी भर जाती है
तेरे सुने सी बगिया को सींच-सींच महकाती है
फिर भी जन्म से पहले ही बेटियाँ मार दी जाती है।
ना रहे ये रिश्ते तो अंधकार में गोता लगाते हो
अपने झूठे सम्मान के खातिर हम पर पहरे कड़े लगाते हो
ये कैसी विडंबना है सखी, जिनकी खुशियों की खातिर कतरा-कतरा खर्च हो जाती है
उन्हीं के झूठे दंभ के कारण बेटियाँ कोख में ही मार दी जाती है।
जिनके बिना एक कदम भी चलना कल्पना मात्र है
क्या तुम्हें नहीं लगता हम भी जीवन और सम्मान के पात्र है?
पुरुष हो तो अपने पौरुष को सार्थक करके दिखाओ
मारने के बजाय हम बेटियों को उचित सम्मान तो दिलाओ
है अपनी शक्ति पे गुमान तो किसी को नया जीवन देकर तो दिखाओ
या पुरुष होने के दंभ में अपना अस्तित्व खुद ही दांव पर लगाओ।
By Sweta Kumari

Comments