Kya Wo Pehle Se Aise The?
By Monica Singh
अब काश कहने से क्या होगा
जब उस वक्त बस नहीं कहा
अब आंसू बहाने का क्या फ़ायदा
जब उस वक्त हद से ज़्यादा सहा
आप देख लीजिए
आप बेहतर जानते हैं
कहकर तुम्हीं ने तो हक़ दिया है
तुम जानकर क्या करोगी
अब ये सुनकर दिल पर क्यों लिया है?
लड़के नहीं रोते कहकर
माँ ने जो शुरू की
आप जैसा कहेंगे मैं वैसा करूँगी
कहकर तुमने उसी रीत को चलाया है
तो क्या वो पहले से ही ऐसे थे
या हमने उन्हें ऐसा बनाया है?
तुमने कहा कि आप रसोई में अच्छे नहीं लगते
और आज उसने तुम्हें रसोई भर के ही क़ाबिल बनाया है
घर सम्भालने के नाम पर तुमने करियर ही नहीं
अपने वजूद तक को गँवाया है
कोख से जन्म तुमने दिया
और surname उसका लगाया है
जिसे खिलोंना भर लाकर उसने खुश कर दिया
उसने रात रात भर तो तुम्हीं को जगाया है
औलाद की हर कामयाबी पर जो गर्व से फूल गया
उसकी हर हार का ज़िम्मेदार आख़िर तुम्हें क्यों ठहराया है?
ज़माना उस पति की लाख सफ़ाइयाँ देता है
तुम बताओ
इतनी उदार होकर तुमने क्या पाया है?
वो तो बचपन में
चोट लगने पर रोना भी चाहते थे
और तुम्हारे छोटे छोटे मज़ाक़ पर हँसना भी
पर हमारे कहने पर ही उसने मरदानगी का चोला अपनाया है
तो क्या वो पहले से ही ऐसे थे
या हमने उन्हें ऐसा बनाया है?
By Monica Singh

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