Kuch Der To Tum Thehar Jaati
Updated: Jul 28, 2025
By Naveen Kumar
चंद बातें तुम से कहनी थी एक किस्सा तुम्हे सुनाना था
बरसों की हिम्मत जुटा के मैं, तेरे रूबरू उस दिन आया था
कुछ देर तो तुम ठहर जाती !!
अफ़साना ऐसे लड़के का जो वैसे तो संजीदा था
देख के तुम्हे लेकिन अक्सर, शैदाई सा होता था ।।
होस्टल के आगे का रास्ता, कालेज की तरफ़ जो जाता था
उस पर कमरे की खिड़की से, रोज़ तुम्हारी वो राह तकता था
और देख लेता जिस दिन तुम्हे, सफ़ेद सूट पहने हुए
उस दिन वो भी सफ़ेद कमीज़, पहन के कॉलेज जाता था
कहानी इक ऐसे शायर की, जो तुम पे शायरी करता था
डायरी में लिखता था सब कुछ, कहने से लेकिन डरता था
शायरी में अपनी रखे उस ने, कई इशारे तुम्हारे लिए
सोचा कभी तो जानोगी तुम, उस की अधूरी हसरत को
पहचानोगी अपने चेहरे को, उस की किसी नज़्म में तुम
समझोगी उस की ग़ज़लों से, उस की बेपनाह मुहब्बत को
दास्तां इक ऐसे रिश्ते की, जो कोख में मेरी ही मर गया
तितली जैसे इक बार उड़ा, न जाने फिर वो किधर गया ।।
आया था उस रोज़ मैं तुम को, इतना ही बतलाने को
मेरी मुहब्बत एकतरफ़ा सही, लेकिन उस में शिद्दत थी
हर घड़ी जो तेरे ख्याल में गुज़री, मेरे लिए इबादत थी ।।
हो रहे थे हम जुदा और तुम्हे रोकने का भी मुझ को हक न था
उस दिन लेकिन जाने क्यों, हाले-दिल तुम्हे कहना ज़रूरी लगा
“बात करने लायक कुछ है ही नहीं " कह के तुम आगे बढ़ गयी
दुनिया मेरी तब से मगर , उसी लम्हे पे जैसे थम सी गयी
चंद लम्हे वो तेरी हयात के, मुझ पे तुम खर्च सकती थी
कुछ और न तो कम से कम, मेरी बात तो सुन सकती थी
काश !! कुछ देर तो तुम ठहर जाती !!
By Naveen Kumar

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