Krishnanjali
By Mrs Aditi Kapeesh Agrawal
ओ साँवरे ओ साँवरे ,जग में सुंदर नाम रे
भक्ति के प्रादुर्भाव मेरी ,मन के मेरे सदभाव रे |
कण कण सृष्टी का निर्माण तू ही,कान्हा तू ही विस्तार रे
आदि तुम्हीं , अंत भी मेरा , जीवन का मेरे उद्धार रे |
उद्गारो के सुर मेरे , बांसुरी के स्वर
तबले की मेरे ,धकिट धिन तिन,धकिट धिन तिन , ताल रे|
ज़िंदगी का रास भी , हारे हुए की आस भी
मन के सभी दुर्भावों का मेरे , कान्हा तू ही ह्वास भी |
तू ही कारण, तू ही अकारण , तू ही धारण साँवरे
तू ही प्रकरण , तू ही विवरण , तू ही निवारण साँवरे |
राधा के मेरी श्याम रे ,सीता के मेरी राम रे
ओ साँवरे ओ साँवरे , जग में सुंदर नाम रे |
By Mrs Aditi Kapeesh Agrawal

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