Kitabein Sab Jala Chahta Hun
- Hashtag Kalakar
- Dec 19, 2025
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By Kshitij Kawatra
किताबें सब जलाना चाहता हूँ
नई दुनिया बनाना चाहता हूँ
सिखाए जोड़ने अल्फ़ाज़ कोई
दिल-ए-सोज़ाँ बुझाना चाहता हूँ
गुल-ए-दाग़-ए-जुनूँ की आरज़ू है
बहाराँ का बहाना चाहता हूँ
हुआ मशहूर मैं तेरी इनायत
सभी को ये बताना चाहता हूँ
मुझे आया नहीं फ़न जीतने का
जिसे देखूँ हराना चाहता हूँ
हँसी में तेरी कुछ पल के लिए मैं
ये हौल-ए-दिल छुपाना चाहता हूँ
गिरेबाँ चाक ले दर दर फिर मैं
किसे जाने रिझाना चाहता हूँ
By Kshitij Kawatra

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