Kitaab
By Aayushi Dey
एक बरगद के पेड़ तले ।
थे कई सारे किस्से ।
कुछ उसकी ,लटकती जड़ों पर ।
तो कुछ ने उकेरे थे ,उसके तन पर ।
उन किस्सों के हिस्से ।।
ना जाने ,किन किस्सों का गवाह
था वो ,विशाल वृक्ष ।
महसूस किए होंगे उसने ।
पूजा वाले ,श्रध्दा के अनगिनत धागे ।
और सुने होंगे ,कितने प्रेमी जोड़ों के
भागने के इरादे ।।
दी होगी कृष्ण को ,तपती धूप मे छाया ।
देखी होगी ,बुद्ध की कड़ी तपस्या ।
और परम ज्ञान की ,प्राप्ती की पराकाष्ठा ।
आखिर कहानियों से भरी इस किताब को ,क्यों जलाना?
आखिर जंगल में बसे ,इस पेड़ को क्यों गिराना ।।
By Aayushi Dey

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