Kissa
By Pratiksha Gondane
तू याद है मेरे कलकी,
तुझमें कल छुपाकर रख्खा है!
तू वजुद है बीते वक्त का,
तुझमें एक खुबसूरत किस्सा समेटकर रख्खा है!
कभी ढुँढू तुझें आजमे, कुछ पुराने तराने गुणगुणालू अभी!
बेशक हाथ छुटा है पर साथ ना छोडूं मै कभी!
तू सुकून है मेरी हलचल की,
तुझमें एक ठेहराव रोके रख्खा है!
तू छाव तपती धुप की,
तुझमें एक साया छिपाये रख्खा है!
By Pratiksha Gondane

Comments