Khudse Ishq Kar
Updated: Jul 8, 2025
By Sakshi Saxena
मोहब्बत का खेल निराला है
कहीं दिलों का जुड़ना है तो कहीं रिश्ता टूट जाना है
इस मोहब्बत में जाने कितने बिखरे हैं
जाने कितने गिरके फ़िर से संभले हैं
मोहब्बत से बेवफ़ाई तक और बेवफ़ाई से तन्हाई तक का सफ़र सबने काटा है
झूठे इश्क और झूठे वादों के आगे खुदसे प्यार करने की कीमत को अब जाना है
गलत शख्स के साथ रहने से तन्हा रह जाने की एहमियत को हमने अब जाना है
ज़रूरी नहीं कि किसी से इश्क हो ही
जो न मिले कोई काबिल तो ज़रूरी नहीं कि दिल को किसी का इंतजार हो ही
तेरी कहानी किसी के साथ बिना भी मुकम्मल है
तुझे ज़िंदगी के सफ़र में हमसफर की क्या जरूरत है
खुदसे तू मोहब्बत कर
खुद का थोड़ा ख्याल कर
है हक तुझे भी मुस्कुराने का
है हक तुझे भी खुदसे इश्क करने का
है हक तुझे भी खुल के ज़िंदगी जीने का
है हक तुझे भी खुदसे इश्क करने का..
By Sakshi Saxena

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