Khuda janta hai
By Deepak Malik
रंग कैसा होगा पानी का वो पानी खुद बे खुद जानता है मालूम हो गैर मर्ज क्या है बंदे को
वो खुद दवा दारू भी जानता है है कितना ऊंचाइयों पर आसमां ये वो फैला पंख पंछी जानता है कब तलक होगा यूं बहना किनारों से नदियों का सफर सब जानता है क्या बताएं के क्या गुजरी मदहोशी में नशे में क्या हुआ बस नशा जानता है दर बदर भटकना कब तक जहां में मेरा नही पता, मेरा वो खुदा जानता है ।
By Deepak Malik

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