Khayaal Ache hai
By Dr. Apoorva Kumar Seth
दिन हुआ तो उनसे कुछ गुफ़्तगू शुरु हो गई..
शाम आते आते उनसे कुछ वादें कर दिए..
अब ख़यालों में उनसे कुछ ऐसे रिश्ते बना लिए की हर ख़्वाब हक़ीक़त लगने लगे ।
अब समझ लिया हे ज़िन्दगी बिना इनके हो जायगी अधूरी..
रहना होगा इनीं में कहीं...
जानते हें ये दुनिया अलग हे
मानते हें सच से बहुत दूर हे
पर अब आलम ये हे कि यही हमदम हे और जीने की वजह भी ।
मन को समझाने के लिए..
ख़याल अच्छे हें ।
By Dr. Apoorva Kumar Seth

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