KHAMOSHIYAAN
Updated: Oct 8, 2022
By Karan Kaushik
खामोशियों से रिश्ता गहरा है मेरा किसी शोर से ज़्यादा
खामोशियों से रिश्ता गहरा है मेरा किसी शोर से ज़्यादा
यह मुझे आवाज़ें नहीं लोगों के एहसास सुनाती है
यूँ तो किसी भीड़ से ज़्यादा शोर करती हैं ये
यूँ तो किसी भीड़ से ज़्यादा शोर करती हैं ये
पर जो किसी मजबूरी के शोर में दब जाते है
ये वो छुपे हुए जज़्बात सुनाती है।
By Karan Kaushik

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