Asal Uttar Ka Veer
Updated: Jul 8, 2025
By Ojeshwini Rajput
बात कुछ उनसठ वर्ष पुरानी है ;
उन्नीस-सौ पैसंठ के इतिवृत की,
अजर अमर कहानी है।
कायरता की सीमा लाघे,
वे भारत में घुस कर आए थे।
साथ स्वयं के कदाचित ,
पैटन टैंकों को भी लाए थे॥
तीस-हजार का जमघट लेकर वे,
हमला करने को आए थे ।
छ्पामार पद्धती चुन कर वे,
मन ही मन इठलाए थे ॥
भारत की ही देन भारत को,
वे दिखलाने आए थे ।
किंतु ,भारत के साहस से वे,
पार कभी ना पाए थे ॥
कहा करते थे ...
पैटन हमारा अजयी होकर आएगा;
किसमे साहस हैं?
कौन हमारे टैंकों से टकराएगा?
अरे! खड़े-खड़े ये ,"खेम-करण",
को क्षण में रौंद कर आएँगे ।
तुम देख लेना की जीत हमारी,
यह सुनिश्चित करके लाएँगे ॥
बस यही भ्रम था,करणवश जिसके,
फिर से मुँह की खाई थी ।
पुनः उन्होनें इतिवृत्त में ,
अपनी,पराजय दर्ज कराई थी ॥
फौलादी थे, हामीद के इरादे ,
जो जीप लेकर चल पडे ।
सोचा नही था क्षण भर भी ,
और पैटन से जाकर भिड़ पड़े॥
घुटनों पर बैठ गया ज़माना,
यह संभव कैसे हो गया?
पैटन को काई जीप भेंद दे,
यह अचंभव कैसे होगया?
खलबली मची थी श्वानों के दल में,
यह सिंह कौन घुस आया है?
बझे हुए अरिदल- मनोबल में,
जो जान फूक ने आया है!
उस अदम्य साहसी महावीर का,
अबदुल हामिद नाम था ।
जो अडिग खड़ा था, माँ की रक्षा में,
आँच नहीं आने दूंगा ...
आने दे तू ऐ शत्रु ! कितने टैंकों को लाएगा?
आगे बढ़ने से पहलें तू,इस पर्वत से टकराएगा ;
कोशिश कर ले लाख मगर, इसे भेद नही तू पाएगा,
....................................भेद नहीं तू पाएँगा॥
By Ojeshwini Rajput

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