Kaho Kalam / कहो कलम
By Garima Joshi
कहो कलम क्या लिखूं आज ?
क्या लिख डालूं सत्य आज का,
या भूतकाल के खोलूँ राज ?
कहो कलम क्या लिखूँ आज ?
कहो कलम श्रृंगार करूं क्या शब्दों का,
या पड़े रहन दूं मधुकर शब्दों को ?
यूहीं बिन पंक्ति बिन साज ?
कहो कलम क्या लिखूं आज ?
लिख डालूं सब मीठा मीठा सा,
या खट्टे का भी छौंका डालूं ?
कटु शब्द भी सीमाओं में काग़ज़ पर लिख डालूं बेबाक,
कहो कलम क्या लिखूं आज ?
लिखूं कहानी प्रेम ग्रंथ या,
जीवन मर्म कथा मैं बांचू ,
मौन रहुं या व्यथा कहूं मैं ?
करूं नुमाइश अपने शब्दों की, बिकने दूं क्या सारे पन्ने,
जो रखे हैं सिरहाने के पास ?
कहो कलम क्या लिखूं आज ?
By Garima Joshi

Comments